उत्तर प्रदेश

समाजवादी पार्टी ने दर्जनभर पार्टियों के साथ किया गठबंंधन

 

लखनऊ
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक दल अपना-अपना कुनबा ज्यादा-से-ज्यादा मजबूत करने में जुटे हैं। छोटी-छोटी पार्टियां सर्वोत्तम सौदेबाजी में जी-जान से जुटी हैं। इसी क्रम में नए-नए गठबंधन बन रहे हैं और जबर्दस्त खेमेबंदी हो रही है। सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा या बीजेपी) से लोहा लेने की क्षमता रखने के लिहाज से समाजवादी पार्टी (सपा) शीर्ष पर है। इस चुनावी लड़ाई में अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए उसने छोटे-छोटे दलों के लिए रास्ता खोल रखा है और उसके गठबंधन में अब तक दर्जनभर पार्टियां आ शामिल हो चुकी हैं। सवाल है कि अखिलेश यादव ने जिन पार्टियों को अपनाया है, क्या वो सपा की चुनावी ताकत बढ़ाने का माद्दा रखते हैं?

इसका जवाब ढूंढने के क्रम में सबसे पहले जान लें कि अब तक समाजवादी पार्टी का किन-किन पार्टियों के साथ गठबंधन हुआ है और कौन सी पार्टियां आगे उनके खेमे में आ सकती हैं। कहा जा रहा है कि राष्ट्रीय लोक दल (RLD) सपा गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी साझेदार होगी। हालांकि, अभी उसकी डील फाइनल नहीं हो पाई है। कहा जा रहा है कि आरएलडी प्रमुख जयंत चौधरी सपा प्रमुख अखिलेश यादव से अपने लिए 36 से 40 सीटें मांग रहे हैं। वहीं, दिल्ली की सत्ता में आसीन आम आदमी पार्टी (AAP) भी लंबे समय से सपा के संपर्क में है। आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह उत्तर प्रदेश से ही हैं और उनकी अखिलेश से लगातार बातचीत हो रही है। अगर आप की डील हो जाती है तो सीटों के लिहाज से वह सपा वाली अगुवाई वाली गठबंधन में तीसरी सबसे बड़ी सहयोगी हो सकती है।

इन छोटे दलों से हो चुकी है सपा की साझेदारी
दो प्रमुख दलों- आरएलडी और आप को छोड़ दें तो सपा ने कई छोटे-छोटे दलों के साथ डील कर ली है। इनमें सुभासपा, जनवादी सोशलिस्ट पार्टी, महान दल, कांशीराम बहुजन मूल समाज पार्टी, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी, पॉलिटिकल जस्टिस पार्टी और अपना दल (कमेरावादी) शामिल हैं। वहीं, दो छोटी पार्टियों- लेबर एस पार्टी और भारतीय किसान सेना ने तो खुद का सपा में विलय ही कर लिया है। इनके अलावा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा या बीएसपी) से बगावत करने वाले नेता भी सपा का रुख कर रहे हैं। इन नेताओं की अपनी-अपनी इलाकाई ताकत है।

गठबंधन दलों को करीब 100 सीटें दे सकती है सपा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में प्रभाव रखने वाली आरएलडी को 40 जबकि पूर्वांचल की 140 सीटों पर अपना दमखम रखने का दावा करने वाले सुभासपा के मुखिया ओमप्रकाश राजभर को 20-22 सीटें मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इनके बीच आम आदमी पार्टी (आप) को भी 25 से 30 सीटें दी जाएं तो इस तरह सपा के खाते से 65 से 72 सीटें निकल जाएंगी। उधर, अन्य गठबंधन दलों के खाते में भी 15-25 सीटें जा सकती हैं। वहीं कुछ बागियों को मिलाकर सपा करीब 100 सीटें अपने गठबंधन साथियों के नाम कर सकती है। इस तरह, कुल 403 सीटों वाली विधानसभा में समाजवादी पार्टी करीब 300 सीटों पर अपने कैंडिडेट खड़ी करेगी।

 

Related Articles

Back to top button
Close