बिलासपुर । बिलासपुर पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ने बिलासपुर को भूमाफियाओं की राजधानी बताते हुए आरोप लगाया है कि बिलासपुर में भूमाफियाओं को राजनैतिक प्रशासनिक और रुसुखदारो का संरक्षण मिला हुआ है। विगत ढाई साल से ऐसा लग रहा है कि मानो कांग्रेस की सरकार सिर्फ माफियाओं के लिए काम करने के लिए बनी हो।
आज पूर्व मंत्री श्री अग्रवाल ने अपने निवास में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य बने दो दशक हो गए पहले कभी ऐसी अव्यवस्था और अराजकता की स्थिति नहीं थी जो पिछले ढाई वर्षो में सरकार की ढुलमुल नीति के कारण उत्पन्न हुई है जिसका परिणाम यह है कि छत्तीसगढ़ में गांव मजरो टोलो से लेकर शहर, राजधानी
न्यायधानी में भूमाफियाओं का बोलबाला है और जमीन जायदाद के कारोबार में शासन सत्ता के संरक्षण में आम लोगों का शोषण सामान्य बात हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार अपने कार्यकाल में राजस्व की व्यवस्थित नीति अपनाई राज्य से संबंधित तार्किक नियमों और उप नियमों का समय-समय पर रिव्यू कर सुधार कर जनता की सुविधा के लिए प्रतिबद्ध प्रयास द्वारा आवश्यक सुधारों को लागू किया गया।
भाजपा की सरकार ने भू माफियाओं के मंसूबों को कभी हावी होने नहीं दिया। कांग्रेस की सरकार बनते ही 5 डिसमिल से छोटे सौदों को अनुमति देने से रजिस्ट्री की बाढ आ गई ।ऑनलाइन रजिस्ट्री के समय बिना बँटाकन के रजिस्ट्री की अनुमति दे दी गई जो सीमांकन संबंधी सारे फसाद की मूल जड़ है ।
उन्होंने कहा कि शासकीय जमीनों की जिला कलेक्टर को 7500 वर्ग फीट नीलामी का अधिकार देकर शासकीय जमीनों की खुली बंदरबांट हो रही है। इस खेल में सभी को पता है कि ऐसे लोग लाभान्वित हो रहे हैं जिनके पास पहले से ही अकूत मिल्कियत और संपत्ति हैं।सार्वजनिक के अपव्यव्य की इस कवायद के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका अंतर्गत शासन की जिलेवार ऐसे भू आबंटन का ब्योरा तैयार करने के लिए नोटिस दिया गया है आने वाले समय में यह पता चल जायेगा कि इस बंदरबांट में क्या-क्या गुल खिलाये गए हैं और कैसे सार्वजनिक संपत्ति का दुरुपयोग कर शासन सत्ता के संरक्षण में लोगों को उपकृत किया जा रहा है ।
उन्होंने कहा कि कि सभी को भलीभांति पता है कि प्रदेश के विभिन्न शहरों के साथ बिलासपुर में भूमि संबंधी विवाद के प्रकरण आए दिन समाचार की सुर्खियों में रहते हैं राजस्व विभाग की गलत नीतियों के कारण और प्रदेश सरकार की अनदेखी के चलते ऐसा कोई दिन नहीं आता जिस दिन किसी शहर के किस थाने में भू माफियाओं की करतूतों ,जमीन विवादों के संबंध में कब्जे मारपीट की घटना आदि के संबंध में रिपोर्ट नही लिखाई गई हो इन समस्याओं के मूल में जाकर देखेंगे तो पाएंगे कि 12 से 15 साल के पुराने प्रकरणों को राजस्व विभाग के अफसरों की मिलीभगत से जबरिया खोलकर सुनवाई की जा रही है अनेक ऐसे मामलों में दोबारा सीमांकन कराकर लोगों को परेशान कर औने पौने में जमीन बेचने पर मजबूर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि ऐसे सारे प्रकरण को जिला प्रशासन को सूचीबद्ध करके समुचित निराकरण करना चाहिए ।शासकीय जमीन पर बेजा कब्जा करना आम बात हो गई है जहां खाली शासकीय जमीन है माफियाओं के द्वारा रिकॉर्ड में हेरफेर कर स्वयं की जमीन से संबंध बताते हुए ऐसे भूखंडों पर कब्जा किया जा रहा है ।यह गंभीर मामला है ।पिछले दिनों गरियाबंद जिले में राजस्व के पटवारियों की मिलीभगत से तहसील की जमीन को ही बेचने का मामला सामने आया इससे यह पता लग सकता है कि स्थिति कितनी गंभीर है ।उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और सुचिता के मद्देनजर भाजपा की सरकार ने ऑनलाइन रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू की थी। बिना आ बटन के रजिस्ट्री नहीं की जा सकती थी इसलिए सीमांकन संबंधी विवाद भी कम थे मगर कांग्रेस की सरकार ने बिना बतांकन के ऑनलाइन रजिस्ट्री के अनुमति देकर विवादों को न्योता दे दिया है ।बीजेपी के कार्यकाल में भी भू माफिया नियमों को अपने ढंग से लागू कराने के लिए जोर लगाते थे पर उनकी बात नहीं बनी ।ऑनलाइन रजिस्ट्री की पारदर्शी प्रणाली आभारी आधारित को परिभाषित प्रक्रिया से विवाद कम होते थे भाजपा की सरकार ने ऑनलाइन रजिस्ट्री में बतांकन बी वन , खसरा ,नक्शा को अनिवार्य बनाया इसके अभाव में रजिस्ट्री नहीं की जा सकती थी ।आजकल किराए की जमीन को 10 प्रतिशत में खरीद कर शासन सत्ता के संरक्षण में खाली कराने का धंधा जोरों से चल रहा है जिसके कारण भी आए दिन विवाद होते रहते हैं भू माफिया भी जोर शोर से सारे बिंदुओं पर छूट के लिए लगे रहते थे ।कांग्रे सरकार ने जनता के हित के बजाय भू माफियाओं के संरक्षण में नियमों को परिवर्तित कर दिया है जिससे आए दिन विवाद की स्थिति खड़ी होती है।
श्री अग्रवाल ने कहा कि बिलासपुर में अवैध प्लाटिंग का काम जोरों से चल रहा है बिना बिना लेआउट बिना डायवर्शन के लोगों को प्लाट बेचे जा रहे हैं और अपनी जीवन भर की कमाई मध्यम वर्ग के लोग ऐसे धंधे वालों के चपेट में आकर व्यर्थ कर रहे हैं। उक्त मामले में दर्ज प्रकरणों पर कारवाही केवल कागजों में हो रही है। नदी नालों के किनारे ग्रीन बेल्ट की जमीन को भी निजी जमीन बताकर निर्माण किए जाने के मामले सामने आए हैं उदाहरण के लिए सकरी के गोकना नाला वाला मामला आदि अनेक प्रकरण है जिसमें बिल्डरों के द्वारा सार्वजनिक प्रयोजन के लिए जमीन को भी नहीं छोड़ा जा रहा है उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उपयोग के लिए निस्तार पत्रक को पूर्ण किए बिना भूमि क्रय विक्रय संबंधी सौदों को मंजूरी दिए जाने से भी आम लोगों को अनेक को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है ।राजस्व विभाग को चाहिए कि बंदोबस्त प्रणाली लागू होने के समय से शासकीय भूमि का परीक्षण कराएं एवं सार्वजनिक प्रयोजनों के निस्तारित भूखंड का यथोचित चिन्हांकन हो ।सौदे के उल्लेख में विस्तार का विवरण अवश्य दिया जाए ।भारतीय जनता पार्टी ने अपने शासनकाल में भू माफियाओं को कभी महत्त्व नहीं दिया राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गौर करें तो आज आप पाएंगे कि राजस्व के अमले को जमीन जायदाद के कारोबार के लिए जिलेवार ठेके पर दे दिया गया हो। झूठी घोषणाओं के पुलिंदो पर ढाई साल पहले कांग्रेस सरकार ने जमीन कारोबारियों के हिसाब से नियमों को बदलना शुरू किया ।फल स्वरुप आज समूचा राज्य ,राजधानी सहित भू माफियाओं के शिकंजे में आ गया है। ऐसा लगता है कि सरकार की मंशा ही गड़बडिय़ों को प्रोत्साहन दिया जाना है इसलिए जानबूझकर नियमो में जनता के हितों से किनारा कर फेरबदल किए जा रहे हैं परिणाम स्वरूप सीमांकन संबंधी विवाद, रजिस्ट्री के घोटाले, जमीनों पर कब्जे के मामले बढ़ रहे हैं और तो और अब यह कारोबार गैंगवार का स्वरूप ले चुका है अगर इस पर शक्ति पूर्वक रोक नहीं लगाई गई तो इससे भी बड़ी दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी इसलिए मुख्यमंत्री एवं राजस्व मंत्री से आग्रह है कि विभागीय नियमों में युक्तिसंगत फेरबदल कर उन्हें लोक हितकारी बनाया जाए जिसका लाभ जनता को मिले ना कि माफियाओं को बिना किसी अपील के लोगों के भू सौदे के 15 15 साल पुराने प्रकरणों को खोल कर उन्हें अनावश्यक परेशान न किया जाए ।बंदोबस्त लागू होने के समय से शासकीय भूमि का व्यवस्थित चिंतन किया जाए राजस्व के अधिकारी और कर्मी आम जनता के हितार्थ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें और भू माफियाओं के साथ संलिप्त लिप्त सेवकों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही की जाए।