मध्य प्रदेश

उपभोक्ता अदालत: कैसे जागे ग्राहक जब एक दर्जन से अधिक जिलो में एक भी मेंबर नहीं

भोपाल
नया उपभोक्ता कानून सिर्फ कागजी घोड़े तक ही सीमित है क्योंकि आधे से अधिक जिलों के अध्यक्ष व सदस्यों के पद लंबे समय से खाली है। इनमें से कुछ तो ऐसे जिले हैं जहां एक भी मेंबर नहीं हैं। खाद्य नागरिक अपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा इन्हें भरने की कवायद तक भी शुरू नहीं की गर्ई। ऐसे में सवाल यह उठता है कि पीड़ितों को कैसे मिले जब सर्किट बैंच एवं पदाधिकाधिकारियों ही नहीं होंगे। उपभोक्ता अदालतों में मामलों की पेंडेंसी यह बयां कर रही है कि उपभोक्ता जाग रहा है,लेकिन शासन-प्रशासन गहरी नींद में सो रहे हैं।

गौरतलब है कि राज्य सरकार आमजनों को उपभोक्ता कानूनों के प्रति जागरूक करने के भले ही लाख दावे करें,लेकिन जमीनी हकीकत इतर ही है। आलम यह है कि अलीराजपुर, सिंगरौली, आगर मालवा एवं निवाड़ी में जिला गठन के कई वर्ष बाद भी उपभोक्ता अदालत की बैंच नहीं खुल सकी। जबकि नए प्रावधानों के मुताबिक प्रत्येक जिले में एक उपभोक्ता अदालत होनी चाहिए। यह इसलिए भी अहम है क्योंकि इन दिनों सायबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं,लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों द्वारा उपभोक्ताओं की मदद करने के बजाय आनाकानी की जा रही है। ऐसे में उन्हें उपभोक्ताओं को अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है,लेकिन यहां भी आकर सुनवाई के इंतजार में उनकी आस टूटने रही है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार भोपाल सहित प्रदेशभर के 11 जिलों के अध्यक्ष एवं 40 से अधिक जिलों के 66 सदस्यों के पद खाली हैं। सिहोर, रायसेन, इंदौर, खंडवा, भिंड, धार, बड़वानी, जबलपुर, सागर आदि जिलों में एक भी मेंबर नहीं हैं। इसके अलावा कु छ ऐसे जिले भी हैं जहां अध्यक्ष व सदस्य दोनों के सभी स्वीकृत पद खाली हैं।

ऐसे में आम उपभोक्तओं त्वरित न्याय मिलने में देरी और मामलों की दोनों गुड गवर्नेंस पर सवाल खडेÞ कर रहे हैं।

प्रदेश जिन चार जिलों में उपभोक्ता अदालतें नहीं हैं उनमें से अलीराजपुर एवं सिंगरौली का गठन 2008 एवं आगर मालवा 2013 व निवाड़ी का गठन 2018 में किया गया था। ऐसे में अब यहां के रहवासियों को दूसरे जिलों की अदालतों में न्याय की गुहार लगाने के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है।

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