छत्तीसगढ़

जच्चा और बच्चा दोनों को तंदरुस्त बना रहा सुपोषण अभियान : क्या खाना है क्या नहीं, कब खाना है कब नहीं, कितना खाना है और कितना नहीं

महासमुन्द
जनता के हिसाब से बेहतर पोषण उपलब्ध कराने की दिशा में प्रदेश सरकार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती से प्रारंभ किए गए इस नवीन कदम में जिला स्तर पर क्रियान्वयन जोरों पर है। लोगों को स्वस्थ और निरोग रखने के उद्देश्य से सुघ्घर लइका चिन्हारी और मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान के तहत जहां एक ओर स्वास्थ्य परीक्षण में कुपोषण और एनिमिया की मुफ्त जांच की जा रही है, वहीं दूसरी ओर भोजन में जरूरी पोषक तत्वों की कमी दूर करने के लिए परामर्श एवं इलाज के साथ आवश्यक दवाएं निःशुल्क उपलब्ध करायी जा रही है। प्रदेश की कुल आबादी में लगभग एक तिहाई से अधिक जनता गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करती है और अधिकांश के दैनिक आहार में पोषक तत्वों की कमी देखी जाती है। जिले की भी सांख्यिकी कुछ इसी तरह है, लेकिन अब मुख्यमंत्री सुपोषण योजना का सीधा फायदा इन तक पहुंचने लगा है। प्रदेशव्यापी सुपोषण अभियान के तहत आगामी तीन सालों में जिले को भी कुपोषण और एनिमिया से मुक्त करने की रणनीति सहित क्रियान्वयन गति तेज कर दी गई है।

जांच शिविर  में आधे से अधिक मिले कुपोषित, जागरूकता से सुधरेंगे खान-पान
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में अब तक कुल 15 से 49 वर्ष की 100845 बालिकाओं व महिलाओं की एनिमिया जांच में गई। जिनमें 51610 एनिमिक निकलीं। विकासखंडवार क्रमशः महासमुंद में 17645 जांच में 10184 एनिमिक, बागबाहरा में 20035 जांच में 7940 एनिमिक, पिथौरा में 23934 जांच में 12331, बसना में 26748 जांच में 15815 एवं सरायपाली में 12483 जांच में 5340 एनिमिक प्रकरण मिले। वहीं, 06 से 59 माह के बच्चों की जांच में भी आंकड़े चौंकाने वाले रहे। क्रमशः महासमुंद में 8819 जांच में 4817 एनिमिक, बागबाहरा में 9154 जांच में 3445 एनिमिक, पिथौरा में 10579 में 2749 एनिमिक, बसना में 10255 में 4585 एवं सरायपाली में 5504 जांच में 2360 बच्चे एनिमिक पाए गए। इस तरह कुल मिला कर जिले में कुल 100845 बालिकाओं व महिलाओं की एनिमिया जांच में 51610 एनिमिक प्रकरण सामने आए एवं 44311 बच्चों (06 से 59 माह) की जांच में 17956 बच्चों के एनिमियाग्रस्त होने की पुष्टि हुई।

370 कुपोषित बच्चों को भेजा पोषण पुर्नवास केंद्र
इसी प्रकार सुघ्घर लइका चिन्हारी शिविर के तीसरे चरण तक जिले में कुल 2374 बच्चों की उपस्थिति दर्ज की गई। जांच उपरांत 1103 मध्यम एवं 969 बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित पाए गए। कुल 1655 बच्चों को आवश्यक दवा वितरित की गई। साथ ही 370 बच्चों को आगामी उपचार के लिए पोषण पुर्नवास केंद्र भेजा गया है।

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